इस प्रकार अपने साथ डाह रखनेवाले पौण्ड्रकको और उसके सखा काशिनरेशको मारकर भगवान् श्रीकृष्ण अपनी राजधानी द्वारकामें लौट आये। उस समय सिद्धगण भगवान्की अमृतमयी कथाका गान कर रहे थे॥ २३॥
एवं मत्सरिणं हत्वा पौण्ड्रकं ससखं हरिः।
द्वारकामाविशत् सिद्धैर्गीयमानकथामृतः॥ २३
इस प्रकार अपने साथ डाह रखनेवाले पौण्ड्रकको और उसके सखा काशिनरेशको मारकर भगवान् श्रीकृष्ण अपनी राजधानी द्वारकामें लौट आये। उस समय सिद्धगण भगवान्की अमृतमयी कथाका गान कर रहे थे॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.66.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 548) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/66/23/