श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.66.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 66 · अथ षट्षष्टितमोऽध्यायः

सर्वस्यान्तर्बहिःसाक्षी कृत्यां माहेश्‍वरीं विभुः।

विज्ञाय तद्विघातार्थं पार्श्‍वस्थं चक्रमादिशत्॥ ३८

sarvasyāntarbahiḥsākṣī kṛtyāṃ māheśvarīṃ vibhuḥ|

vijñāya tadvighātārthaṃ pārśvasthaṃ cakramādiśat|| 38

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् सबके बाहर-भीतरकी जाननेवाले हैं। वे जान गये कि यह काशीसे चली हुई माहेश्‍वरी कृत्या है। उन्होंने उसके प्रतीकारके लिये अपने पास ही विराजमान चक्रसुदर्शनको आज्ञा दी॥ ३८॥

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