bhūtānāmanukampārthaṃ tvaṃ tu mithyābhidhāṃ tyaja|| 5
अर्थ
‘एकमात्र मैं ही वासुदेव हूँ। दूसरा कोई नहीं है। प्राणियोंपर कृपा करनेके लिये मैंने ही अवतार ग्रहण किया है। तुमने झूठ-मूठ अपना नाम वासुदेव रख लिया है, अब उसे छोड़ दो॥ ५॥
वासुदेवोऽवतीर्णोऽहमेक एव न चापरः।
भूतानामनुकम्पार्थं त्वं तु मिथ्याभिधां त्यज॥ ५
‘एकमात्र मैं ही वासुदेव हूँ। दूसरा कोई नहीं है। प्राणियोंपर कृपा करनेके लिये मैंने ही अवतार ग्रहण किया है। तुमने झूठ-मूठ अपना नाम वासुदेव रख लिया है, अब उसे छोड़ दो॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.66.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 546) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/66/5/