tyaktvaihi māṃ tvaṃ śaraṇaṃ no ced dehi mamāhavam|| 6
अर्थ
यदुवंशी! तुमने मूर्खतावश मेरे चिह्न धारण कर रखे हैं। उन्हें छोड़कर मेरी शरणमें आओ और यदि मेरी बात तुम्हें स्वीकार न हो, तो मुझसे युद्ध करो’॥ ६॥
यानि त्वमस्मच्चिह्नानि मौढ्याद् बिभर्षि सात्वत।
त्यक्त्वैहि मां त्वं शरणं नो चेद् देहि ममाहवम्॥ ६
यदुवंशी! तुमने मूर्खतावश मेरे चिह्न धारण कर रखे हैं। उन्हें छोड़कर मेरी शरणमें आओ और यदि मेरी बात तुम्हें स्वीकार न हो, तो मुझसे युद्ध करो’॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.66.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 546) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/66/6/