श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

तं तु ते विरथं चक्रुश्‍चत्वारश्‍चतुरो हयान्।

एकस्तु सारथिं जघ्ने चिच्छेदान्यः शरासनम्॥ ११

taṃ tu te virathaṃ cakruścatvāraścaturo hayān|

ekastu sārathiṃ jaghne cicchedānyaḥ śarāsanam|| 11

अर्थ

इसके बाद उन छहों वीरोंने एक साथ मिलकर साम्बको रथहीन कर दिया। चार वीरोंने एक-एक बाणसे उनके चार घोड़ोंको मारा, एकने सारथिको और एकने साम्बका धनुष काट डाला॥ ११॥✎ 1702

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1702 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मुक्त-कण्ठसे → मुक्तकण्ठसे

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें