श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

तं बद‍्ध्वा विरथीकृत्य कृच्छ्रेण कुरवो युधि।

कुमारं स्वस्य कन्यां च स्वपुरं जयिनोऽविशन्॥ १२

taṃ baddhvā virathīkṛtya kṛcchreṇa kuravo yudhi|

kumāraṃ svasya kanyāṃ ca svapuraṃ jayino'viśan|| 12

अर्थ

इस प्रकार कौरवोंने युद्धमें बड़ी कठिनाई और कष्टसे साम्बको रथहीन करके बाँध लिया। इसके बाद वे उन्हें तथा अपनी कन्या लक्ष्मणाको लेकर जय मनाते हुए हस्तिनापुर लौट आये॥ १२॥✎ 1702

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1702 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मुक्त-कण्ठसे → मुक्तकण्ठसे

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