॥ श्रीहरिः ॥
तच्छ्रुत्वा नारदोक्तेन राजन् संजातमन्यवः।
कुरून् प्रत्युद्यमं चक्रुरुग्रसेनप्रचोदिताः॥ १३
tacchrutvā nāradoktena rājan saṃjātamanyavaḥ|
kurūn pratyudyamaṃ cakrurugrasenapracoditāḥ|| 13
अर्थ
परीक्षित्! नारदजीसे यह समाचार सुनकर यदुवंशियोंको बड़ा क्रोध आया। वे महाराज उग्रसेनकी आज्ञासे कौरवोंपर चढ़ाई करनेकी तैयारी करने लगे॥ १३॥
तच्छ्रुत्वा नारदोक्तेन राजन् संजातमन्यवः।
कुरून् प्रत्युद्यमं चक्रुरुग्रसेनप्रचोदिताः॥ १३
परीक्षित्! नारदजीसे यह समाचार सुनकर यदुवंशियोंको बड़ा क्रोध आया। वे महाराज उग्रसेनकी आज्ञासे कौरवोंपर चढ़ाई करनेकी तैयारी करने लगे॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 555) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/68/13/