श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

त इमे मन्दमतयः कलहाभिरताः खलाः।

तं मामवज्ञाय मुहुर्दुर्भाषान् मानिनोऽब्रुवन्॥ ३३

ta ime mandamatayaḥ kalahābhiratāḥ khalāḥ|

taṃ māmavajñāya muhurdurbhāṣān mānino'bruvan|| 33

अर्थ

फिर भी ये मूर्ख ऐसी दुष्टता कर रहे हैं! इन्हें शान्ति प्यारी नहीं, कलह प्यारी है। ये इतने घमंडी हो रहे हैं कि बार-बार मेरा तिरस्कार करके गालियाँ बक गये हैं॥ ३३॥

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