श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

नोग्रसेनः किल विभुर्भोजवृष्ण्यन्धकेश्‍वरः।

शक्रादयो लोकपाला यस्यादेशानुवर्तिनः॥ ३४

nograsenaḥ kila vibhurbhojavṛṣṇyandhakeśvaraḥ|

śakrādayo lokapālā yasyādeśānuvartinaḥ|| 34

अर्थ

ठीक है, भाई! ठीक है। पृथ्वीके राजाओंकी तो बात ही क्या, त्रिलोकीके स्वामी इन्द्र आदि लोकपाल जिनकी आज्ञाका पालन करते हैं, वे उग्रसेन राजाधिराज नहीं हैं; वे तो केवल भोज, वृष्णि और अन्धकवंशी यादवोंके ही स्वामी हैं!॥ ३४॥

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