श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

इति कर्णः शलो भूरिर्यज्ञकेतुः सुयोधनः।

साम्बमारेभिरे बद‍्धुं कुरुवृद्धानुमोदिताः॥ ५

iti karṇaḥ śalo bhūriryajñaketuḥ suyodhanaḥ|

sāmbamārebhire baddhuṃ kuruvṛddhānumoditāḥ|| 5

अर्थ

ऐसा विचार करके कर्ण, शल, भूरिश्रवा, यज्ञकेतु और दुर्योधनादि वीरोंने कुरुवंशके बड़े-बूढ़ोंकी अनुमति ली तथा साम्बको पकड़ लेनेकी तैयारी की॥ ५॥✎ 1701

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1701 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: जाम्बवती-नन्दन → जाम्बवतीनन्दन

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