श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

दृष्ट्वानुधावतः साम्बो धार्तराष्ट्रान् महारथः।

प्रगृह्य रुचिरं चापं तस्थौ सिंह इवैकलः॥ ६

dṛṣṭvānudhāvataḥ sāmbo dhārtarāṣṭrān mahārathaḥ|

pragṛhya ruciraṃ cāpaṃ tasthau siṃha ivaikalaḥ|| 6

अर्थ

जब महारथी साम्बने देखा कि धृतराष्ट्रके पुत्र मेरा पीछा कर रहे हैं, तब वे एक सुन्दर धनुष चढ़ाकर सिंहके समान अकेले ही रणभूमिमें डट गये॥ ६॥✎ 1858

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1858 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): ्सिंहके → सिंहके

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