अद्यापि च पुरं ह्येतत् सूचयद् रामविक्रमम्।
समुन्नतं दक्षिणतो गंगायामनुदृश्यते॥ ५४
परीक्षित्! यह हस्तिनापुर आज भी दक्षिणकी ओर ऊँचा और गंगाजीकी ओर कुछ झुका हुआ है और इस प्रकार यह भगवान् बलरामजीके पराक्रमकी सूचना दे रहा है॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 560) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/68/54/