kṛṣṇenaikena bahvīnāṃ tad didṛkṣuḥ sma nāradaḥ|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब देवर्षि नारदने सुना कि भगवान् श्रीकृष्णने नरकासुर (भौमासुर) को मारकर अकेले ही हजारों राज-कुमारियोंके साथ विवाह कर लिया है, तब उनके मनमें भगवान्की रहन-सहन देखनेकी बड़ी अभिलाषा हुई॥ १॥
नरकं निहतं श्रुत्वा तथोद्वाहं च योषिताम्।
कृष्णेनैकेन बह्वीनां तद् दिदृक्षुः स्म नारदः॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब देवर्षि नारदने सुना कि भगवान् श्रीकृष्णने नरकासुर (भौमासुर) को मारकर अकेले ही हजारों राज-कुमारियोंके साथ विवाह कर लिया है, तब उनके मनमें भगवान्की रहन-सहन देखनेकी बड़ी अभिलाषा हुई॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 560) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/1/