विश्वकर्माने बहुत-से ऐसे चँदोवे बना रखे थे, जिनमें मोतीकी लड़ियोंकी झालरें लटक रही थीं। हाथी-दाँतके बने हुए आसन और पलँग थे, जिनमें श्रेष्ठ-श्रेष्ठ मणि जड़ी हुई थी॥ १०॥✎ 2127
वितानैर्निर्मितैस्त्वष्ट्रा मुक्तादामविलम्बिभिः।
दान्तैरासनपर्यंकैर्मण्युत्तमपरिष्कृतैः ॥ १०
विश्वकर्माने बहुत-से ऐसे चँदोवे बना रखे थे, जिनमें मोतीकी लड़ियोंकी झालरें लटक रही थीं। हाथी-दाँतके बने हुए आसन और पलँग थे, जिनमें श्रेष्ठ-श्रेष्ठ मणि जड़ी हुई थी॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 561) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)