बहुत-सी दासियाँ गलेमें सोनेका हार पहने और सुन्दर वस्त्रोंसे सुसज्जित होकर तथा बहुत-से सेवक भी जामा-पगड़ी और सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहने तथा जड़ाऊ कुण्डल धारण किये अपने-अपने काममें व्यस्त थे और महलकी शोभा बढ़ा रहे थे॥ ११॥✎ 2127
दासीभिर्निष्ककण्ठीभिः सुवासोभिरलंकृतम्।
पुम्भिः सकञ्चुकोष्णीषसुवस्त्रमणिकुण्डलैः॥ ११
बहुत-सी दासियाँ गलेमें सोनेका हार पहने और सुन्दर वस्त्रोंसे सुसज्जित होकर तथा बहुत-से सेवक भी जामा-पगड़ी और सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहने तथा जड़ाऊ कुण्डल धारण किये अपने-अपने काममें व्यस्त थे और महलकी शोभा बढ़ा रहे थे॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 561) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/11/