श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

दासीभिर्निष्ककण्ठीभिः सुवासोभिरलंकृतम्।

पुम्भिः सकञ्चुकोष्णीष५सुवस्त्रमणिकुण्डलैः॥ ११

dāsībhirniṣkakaṇṭhībhiḥ suvāsobhiralaṃkṛtam|

pumbhiḥ sakañcukoṣṇīṣasuvastramaṇikuṇḍalaiḥ|| 11

अर्थ

बहुत-सी दासियाँ गलेमें सोनेका हार पहने और सुन्दर वस्त्रोंसे सुसज्जित होकर तथा बहुत-से सेवक भी जामा-पगड़ी और सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहने तथा जड़ाऊ कुण्डल धारण किये अपने-अपने काममें व्यस्त थे और महलकी शोभा बढ़ा रहे थे॥ ११॥✎ 2127

टिप्पणियाँ

  1. ५

    षैः सुवासोमणि०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 561)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2127 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें