परीक्षित्! इसके बाद देवर्षि नारदजी योगेश्वरोंके भी ईश्वर भगवान् श्रीकृष्णकी योगमायाका रहस्य जाननेके लिये उनकी दूसरी पत्नीके महलमें गये॥ १९॥✎ 1705
ततोऽन्यदाविशद् गेहं कृष्णपत्न्याः स नारदः।
योगेश्वरेश्वरस्याङ्ग योगमायाविवित्सया॥ १९
परीक्षित्! इसके बाद देवर्षि नारदजी योगेश्वरोंके भी ईश्वर भगवान् श्रीकृष्णकी योगमायाका रहस्य जाननेके लिये उनकी दूसरी पत्नीके महलमें गये॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 563) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)