श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

दीव्यन्तमक्षैस्तत्रापि प्रियया चोद्धवेन च।

पूजितः परया भक्त्या प्रत्युत्थानासनादिभिः॥ २०

dīvyantamakṣaistatrāpi priyayā coddhavena ca|

pūjitaḥ parayā bhaktyā pratyutthānāsanādibhiḥ|| 20

अर्थ

वहाँ उन्होंने देखा कि भगवान् श्रीकृष्ण अपनी प्राणप्रिया और उद्धवजीके साथ चौसर खेल रहे हैं। वहाँ भी भगवान्‌ने खड़े होकर उनका स्वागत किया, आसनपर बैठाया और विविध सामग्रियोंद्वारा बड़ी भक्तिसे उनकी अर्चा-पूजा की॥ २०॥✎ 1705

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1705 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: यज्ञ-कुण्डोंमें → यज्ञकुण्डोंमें

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