उस महलमें भी देवर्षि नारदने देखा कि भगवान् श्रीकृष्ण अपने नन्हे-नन्हे बच्चोंको दुलार रहे हैं। वहाँसे फिर दूसरे महलमें गये तो क्या देखते हैं कि भगवान् श्रीकृष्ण स्नानकी तैयारी कर रहे हैं॥ २३॥✎ 1705
तत्राप्यचष्ट गोविन्दं लालयन्तं सुताञ्छिशून्।
ततोऽन्यस्मिन् गृहेऽपश्यन्मज्जनाय कृतोद्यमम्॥ २३
उस महलमें भी देवर्षि नारदने देखा कि भगवान् श्रीकृष्ण अपने नन्हे-नन्हे बच्चोंको दुलार रहे हैं। वहाँसे फिर दूसरे महलमें गये तो क्या देखते हैं कि भगवान् श्रीकृष्ण स्नानकी तैयारी कर रहे हैं॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 563) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)