परीक्षित्! इस प्रकार मनुष्यकी-सी लीला करते हुए हृषीकेश भगवान् श्रीकृष्णकी योगमायाका वैभव देखकर देवर्षि नारदजीने मुसकराते हुए उनसे कहा—॥ ३७॥✎ 1706
अथोवाच हृषीकेशं नारदः प्रहसन्निव।
योगमायोदयं वीक्ष्य मानुषीमीयुषो गतिम्॥ ३७
परीक्षित्! इस प्रकार मनुष्यकी-सी लीला करते हुए हृषीकेश भगवान् श्रीकृष्णकी योगमायाका वैभव देखकर देवर्षि नारदजीने मुसकराते हुए उनसे कहा—॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 565) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/69/37/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)