राजा परीक्षित्ने पूछा—प्रभो! सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि अनेकों अवतार धारण करके बहुत-सी सुन्दर एवं सुननेमें मधुर लीलाएँ करते हैं। वे सभी मेरे हृदयको बहुत प्रिय लगती हैं॥ १॥✎ 883
येन येनावतारेण भगवान् हरिरीश्वरः।
करोति कर्णरम्याणि मनोज्ञानि च नः प्रभो॥ १
राजा परीक्षित्ने पूछा—प्रभो! सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि अनेकों अवतार धारण करके बहुत-सी सुन्दर एवं सुननेमें मधुर लीलाएँ करते हैं। वे सभी मेरे हृदयको बहुत प्रिय लगती हैं॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.7.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 162) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/7/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#883 शब्दोंके बीचका स्थान: सर्वशक्तिमान्भगवान् → सर्वशक्तिमान् भगवान्