श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

रुदन्तं सुतमादाय यशोदा ग्रहशंकिता।

कृतस्वस्त्ययनं विप्रैः सूक्तैः स्तनमपाययत्॥ ११

rudantaṃ sutamādāya yaśodā grahaśaṃkitā|

kṛtasvastyayanaṃ vipraiḥ sūktaiḥ stanamapāyayat|| 11

अर्थ

यशोदाजीने समझा यह किसी ग्रह आदिका उत्पात है। उन्होंने अपने रोते हुए लाड़ले लालको गोदमें लेकर ब्राह्मणोंसे वेदमन्त्रोंके द्वारा शान्तिपाठ कराया और फिर वे उसे स्तन पिलाने लगीं॥ ११॥

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