श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

इति बालकमादाय सामर्ग्यजुरुपाकृतैः।

जलैः पवित्रौषधिभिरभिषिच्य द्विजोत्तमैः॥ १४

iti bālakamādāya sāmargyajurupākṛtaiḥ|

jalaiḥ pavitrauṣadhibhirabhiṣicya dvijottamaiḥ|| 14

अर्थ

यह सोचकर नन्दबाबाने बालकको गोदमें उठा लिया और ब्राह्मणोंसे साम, ऋक् और यजुर्वेदके मन्त्रोंद्वारा संस्कृत एवं पवित्र ओषधियोंसे युक्त जलसे अभिषेक कराया॥ १४॥

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