श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

खं रोदसी ज्योतिरनीकमाशाः

सूर्येन्दुवह्निश्‍वसनाम्बुधींश्‍च ।

द्वीपान् नगांस्तद्दुहितॄर्वनानि

भूतानि यानि स्थिरजंगमानि॥ ३६

khaṃ rodasī jyotiranīkamāśāḥ

sūryenduvahniśvasanāmbudhīṃśca |

dvīpān nagāṃstadduhitṝrvanāni

bhūtāni yāni sthirajaṃgamāni|| 36

अर्थ

उसमें आकाश, अन्तरिक्ष, ज्योतिर्मण्डल, दिशाएँ, सूर्य, चन्द्रमा, अग्‍नि, वायु, समुद्र, द्वीप, पर्वत, नदियाँ, वन और समस्त चराचर प्राणी स्थित हैं॥ ३६॥

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