श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

औत्थानिकौत्सुक्यमना मनस्विनी

समागतान् पूजयती व्रजौकसः।

नैवाशृणोद् वै रुदितं सुतस्य सा

रुदन् स्तनार्थी चरणावुदक्षिपत्॥ ६

autthānikautsukyamanā manasvinī

samāgatān pūjayatī vrajaukasaḥ|

naivāśṛṇod vai ruditaṃ sutasya sā

rudan stanārthī caraṇāvudakṣipat|| 6

अर्थ

थोड़ी देरमें श्यामसुन्दरकी आँखें खुलीं, तो वे स्तन-पानके लिये रोने लगे। उस समय मनस्विनी यशोदाजी उत्सवमें आये हुए व्रजवासियोंके स्वागत-सत्कारमें बहुत ही तन्मय हो रही थीं। इसलिये उन्हें श्रीकृष्णका रोना सुनायी नहीं पड़ा। तब श्रीकृष्ण रोते-रोते अपने पाँव उछालने लगे॥ ६॥

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