॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.7.8
दृष्ट्वा यशोदाप्रमुखा व्रजस्त्रिय
औत्थानिके कर्मणि याः समागताः।
नन्दादयश्चाद्भुतदर्शनाकुलाः
कथं स्वयं वै शकटं विपर्यगात्॥ ८
dṛṣṭvā yaśodāpramukhā vrajastriya
autthānike karmaṇi yāḥ samāgatāḥ|
nandādayaścādbhutadarśanākulāḥ
kathaṃ svayaṃ vai śakaṭaṃ viparyagāt|| 8
अर्थ
करवट बदलनेके उत्सवमें जितनी भी स्त्रियाँ आयी हुई थीं, वे सब और यशोदा, रोहिणी, नन्दबाबा और गोपगण इस विचित्र घटनाको देखकर व्याकुल हो गये। वे आपसमें कहने लगे—‘अरे, यह क्या हो गया? यह छकड़ा अपने-आप कैसे उलट गया?’॥ ८॥