‘देवर्षे! इस समय तीनों लोकोंमें कुशल-मंगल तो है न’? आप तीनों लोकोंमें विचरण करते रहते हैं, इससे हमें यह बहुत बड़ा लाभ है कि घर बैठे सबका समाचार मिल जाता है॥ ३५॥✎ 1708
अपि स्विदद्य लोकानां त्रयाणामकुतोभयम्।
ननु भूयान् भगवतो लोकान् पर्यटतो गुणः॥ ३५
‘देवर्षे! इस समय तीनों लोकोंमें कुशल-मंगल तो है न’? आप तीनों लोकोंमें विचरण करते रहते हैं, इससे हमें यह बहुत बड़ा लाभ है कि घर बैठे सबका समाचार मिल जाता है॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.70.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 571) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/70/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)