ईश्वरके द्वारा रचे हुए तीनों लोकोंमें ऐसी कोई बात नहीं है, जिसे आप न जानते हों। अतः हम आपसे यह जानना चाहते हैं कि युधिष्ठिर आदि पाण्डव इस समय क्या करना चाहते हैं?’॥ ३६॥✎ 1708
न हि तेऽविदितं किंचिल्लोकेष्वीश्वरकर्तृषु।
अथ पृच्छामहे युष्मान् पाण्डवानां चिकीर्षितम्॥ ३६
ईश्वरके द्वारा रचे हुए तीनों लोकोंमें ऐसी कोई बात नहीं है, जिसे आप न जानते हों। अतः हम आपसे यह जानना चाहते हैं कि युधिष्ठिर आदि पाण्डव इस समय क्या करना चाहते हैं?’॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.70.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 571) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/70/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)