इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णने यदुराज उग्रसेन और बलरामजीसे आज्ञा लेकर बाल-बच्चोंके साथ रानियों और उनके सब सामानोंको आगे चला दिया और फिर दारुकके लाये हुए गरुड़ध्वज रथपर स्वयं सवार हुए॥ १३॥
निर्गमय्यावरोधान् स्वान् ससुतान् सपरिच्छदान्।
संकर्षणमनुज्ञाप्य यदुराजं च शत्रुहन्।
सूतोपनीतं स्वरथमारुहद् गरुडध्वजम्॥ १३
इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णने यदुराज उग्रसेन और बलरामजीसे आज्ञा लेकर बाल-बच्चोंके साथ रानियों और उनके सब सामानोंको आगे चला दिया और फिर दारुकके लाये हुए गरुड़ध्वज रथपर स्वयं सवार हुए॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.71.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 575) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/71/13/