श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.41

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

पितृष्वसुर्गुरुस्त्रीणां कृष्णश्‍चक्रेऽभिवादनम्।

स्वयं च कृष्णया राजन् भगिन्या चाभिवन्दितः॥ ४१

pitṛṣvasurgurustrīṇāṃ kṛṣṇaścakre'bhivādanam|

svayaṃ ca kṛṣṇayā rājan bhaginyā cābhivanditaḥ|| 41

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने अपनी फूआ कुन्ती और गुरुजनोंकी पत्‍नियोंका अभिवादन किया। उनकी बहिन सुभद्रा और द्रौपदीने भगवान्‌को नमस्कार किया॥ ४१॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें