देवदेवेश्वर भगवान् श्रीकृष्णको राजमहलके अंदर लाकर राजा युधिष्ठिर आदरभाव और आनन्दके उद्रेकसे आत्म-विस्मृत हो गये; उन्हें इस बातकी भी सुधि न रही कि किस क्रमसे भगवान्की पूजा करनी चाहिये॥ ४०॥
गोविन्दं गृहमानीय देवदेवेशमादृतः।
पूजायां नाविदत् कृत्यं प्रमोदोपहतो नृपः॥ ४०
देवदेवेश्वर भगवान् श्रीकृष्णको राजमहलके अंदर लाकर राजा युधिष्ठिर आदरभाव और आनन्दके उद्रेकसे आत्म-विस्मृत हो गये; उन्हें इस बातकी भी सुधि न रही कि किस क्रमसे भगवान्की पूजा करनी चाहिये॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.71.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 579) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/71/40/