परीक्षित्! जरासन्ध और भीमसेन दोनोंकी गदा-युद्धमें कुशलता, बल और उत्साह समान थे। दोनोंकी शक्ति तनिक भी क्षीण नहीं हो रही थी। इस प्रकार लगातार प्रहार करते रहनेपर भी दोनोंमेंसे किसीकी जीत या हार न हुई॥ ३९॥
तयोरेवं प्रहरतोः समशिक्षाबलौजसोः।
निर्विशेषमभूद् युद्धमक्षीणजवयोर्नृप॥ ३९
परीक्षित्! जरासन्ध और भीमसेन दोनोंकी गदा-युद्धमें कुशलता, बल और उत्साह समान थे। दोनोंकी शक्ति तनिक भी क्षीण नहीं हो रही थी। इस प्रकार लगातार प्रहार करते रहनेपर भी दोनोंमेंसे किसीकी जीत या हार न हुई॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.72.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 585) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/72/39/