भगवान् श्रीकृष्णने कहा—नरपतियो! तुमलोगोंने जैसी इच्छा प्रकट की है, उसके अनुसार आजसे मुझमें तुमलोगोंकी निश्चय ही सुदृढ़ भक्ति होगी। यह जान लो कि मैं सबका आत्मा और सबका स्वामी हूँ॥ १८॥✎ 1710
अद्यप्रभृति वो भूपा मय्यात्मन्यखिलेश्वरे।
सुदृढा जायते भक्तिर्बाढमाशंसितं तथा॥ १८
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—नरपतियो! तुमलोगोंने जैसी इच्छा प्रकट की है, उसके अनुसार आजसे मुझमें तुमलोगोंकी निश्चय ही सुदृढ़ भक्ति होगी। यह जान लो कि मैं सबका आत्मा और सबका स्वामी हूँ॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.73.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 589) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/73/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)