इन्द्रप्रस्थनिवासियोंका मन उस शंखध्वनिको सुनकर खिल उठा। उन्होंने समझ लिया कि जरासन्ध मर गया और अब राजा युधिष्ठिरका राजसूय-यज्ञ करनेका संकल्प एक प्रकारसे पूरा हो गया॥ ३३॥✎ 1711
तच्छ्रुत्वा प्रीतमनस इन्द्रप्रस्थनिवासिनः।
मेनिरे मागधं शान्तं राजा चाप्तमनोरथः॥ ३३
इन्द्रप्रस्थनिवासियोंका मन उस शंखध्वनिको सुनकर खिल उठा। उन्होंने समझ लिया कि जरासन्ध मर गया और अब राजा युधिष्ठिरका राजसूय-यज्ञ करनेका संकल्प एक प्रकारसे पूरा हो गया॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.73.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 590) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/73/33/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)