भीमसेन, अर्जुन और भगवान् श्रीकृष्णने राजा युधिष्ठिरकी वन्दना की और वह सब कृत्य कह सुनाया, जो उन्हें जरासन्धके वधके लिये करना पड़ा था॥ ३४॥✎ 1711
अभिवन्द्याथ राजानं भीमार्जुनजनार्दनाः।
सर्वमाश्रावयांचक्रुरात्मना यदनुष्ठितम्॥ ३४
भीमसेन, अर्जुन और भगवान् श्रीकृष्णने राजा युधिष्ठिरकी वन्दना की और वह सब कृत्य कह सुनाया, जो उन्हें जरासन्धके वधके लिये करना पड़ा था॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.73.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 590) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/73/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)