श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

श्रुत्वा द्विजेरितं राजा ज्ञात्वा हार्दं सभासदाम्।

समर्हयद‍्धृषीकेशं प्रीतः प्रणयविह्वलः॥ २६

śrutvā dvijeritaṃ rājā jñātvā hārdaṃ sabhāsadām|

samarhayaddhṛṣīkeśaṃ prītaḥ praṇayavihvalaḥ|| 26

अर्थ

धर्मराज युधिष्ठिरने ब्राह्मणोंकी यह आज्ञा सुनकर तथा सभासदोंका अभिप्राय जानकर बड़े आनन्दसे प्रेमोद्रेकसे विह्वल होकर भगवान् श्रीकृष्णकी पूजा की॥ २६॥

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