श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.43

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

तावदुत्थाय भगवान् स्वान् निवार्य स्वयं रुषा।

शिरः क्षुरान्तचक्रेण जहारापततो रिपोः॥ ४३

tāvadutthāya bhagavān svān nivārya svayaṃ ruṣā|

śiraḥ kṣurāntacakreṇa jahārāpatato ripoḥ|| 43

अर्थ

उन लोगोंको लड़ते-झगड़ते देख भगवान् श्रीकृष्ण उठ खड़े हुए। उन्होंने अपने पक्षपाती राजाओंको शान्त किया और स्वयं क्रोध करके अपने ऊपर झपटते हुए शिशुपालका सिर छुरेके समान तीखी धारवाले चक्रसे काट लिया॥ ४३॥

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