श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.44

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

शब्दः कोलाहलोऽप्यासीत् शिशुपाले हते महान्।

तस्यानुयायिनो भूपा दुद्रुवुर्जीवितैषिणः॥ ४४

śabdaḥ kolāhalo'pyāsīt śiśupāle hate mahān|

tasyānuyāyino bhūpā dudruvurjīvitaiṣiṇaḥ|| 44

अर्थ

शिशुपालके मारे जानेपर वहाँ बड़ा कोलाहल मच गया। उसके अनुयायी नरपति अपने-अपने प्राण बचानेके लिये वहाँसे भाग खड़े हुए॥ ४४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें