परीक्षित्! इस प्रकार योगेश्वरेश्वर भगवान् श्रीकृष्णने धर्मराज युधिष्ठिरका राजसूय यज्ञ पूर्ण किया और अपने सगे-सम्बन्धी और सुहृदोंकी प्रार्थनासे कुछ महीनोंतक वहीं रहे॥ ४८॥
साधयित्वा क्रतुं राज्ञः कृष्णो योगेश्वरेश्वरः।
उवास कतिचिन्मासान् सुहृद्भिरभियाचितः॥ ४८
परीक्षित्! इस प्रकार योगेश्वरेश्वर भगवान् श्रीकृष्णने धर्मराज युधिष्ठिरका राजसूय यज्ञ पूर्ण किया और अपने सगे-सम्बन्धी और सुहृदोंकी प्रार्थनासे कुछ महीनोंतक वहीं रहे॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.74.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 596) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/74/48/