॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.75.15
तैलगोरसगन्धोदहरिद्रासान्द्रकुंकुमैः ।
पुम्भिर्लिप्ताः प्रलिम्पन्त्यो विजह्रुर्वारयोषितः॥ १५✎ 1188
tailagorasagandhodaharidrāsāndrakuṃkumaiḥ |
pumbhirliptāḥ pralimpantyo vijahrurvārayoṣitaḥ|| 15
अर्थ
वाराङ्गनाएँ पुरुषोंको तेल, गोरस, सुगन्धित जल, हल्दी और गाढ़ी केसर मल देतीं और पुरुष भी उन्हें उन्हीं वस्तुओंसे सराबोर कर देते॥ १५॥