महाराज युधिष्ठिरके स्नान कर लेनेके बाद सभी वर्णों एवं आश्रमोंके लोगोंने गंगाजीमें स्नान किया; क्योंकि इस स्नानसे बड़े-से-बड़ा महापापी भी अपनी पाप-राशिसे तत्काल मुक्त हो जाता है॥ २१॥
सस्नुस्तत्र ततः सर्वे वर्णाश्रमयुता नराः।
महापातक्यपि यतः सद्यो मुच्येत किल्बिषात्॥ २१
महाराज युधिष्ठिरके स्नान कर लेनेके बाद सभी वर्णों एवं आश्रमोंके लोगोंने गंगाजीमें स्नान किया; क्योंकि इस स्नानसे बड़े-से-बड़ा महापापी भी अपनी पाप-राशिसे तत्काल मुक्त हो जाता है॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.75.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 599) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/75/21/