श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.75.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 75 · अथ पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः

सस्नुस्तत्र ततः सर्वे वर्णाश्रमयुता नराः।

महापातक्यपि यतः सद्यो मुच्येत किल्बिषात्॥ २१

sasnustatra tataḥ sarve varṇāśramayutā narāḥ|

mahāpātakyapi yataḥ sadyo mucyeta kilbiṣāt|| 21

अर्थ

महाराज युधिष्ठिरके स्नान कर लेनेके बाद सभी वर्णों एवं आश्रमोंके लोगोंने गंगाजीमें स्नान किया; क्योंकि इस स्नानसे बड़े-से-बड़ा महापापी भी अपनी पाप-राशिसे तत्काल मुक्त हो जाता है॥ २१॥

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