॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.75.7
निरूपिता महायज्ञे नानाकर्मसु ते तदा।
प्रवर्तन्ते स्म राजेन्द्र राज्ञः प्रियचिकीर्षवः॥ ७
nirūpitā mahāyajñe nānākarmasu te tadā|
pravartante sma rājendra rājñaḥ priyacikīrṣavaḥ|| 7
अर्थ
परीक्षित्! इसी प्रकार सात्यकि, विकर्ण, हार्दिक्य, विदुर, भूरिश्रवा आदि बाह्लीकके पुत्र और सन्तर्दन आदि राजसूय यज्ञमें विभिन्न कर्मोंमें नियुक्त थे। वे सब-के-सब वैसा ही काम करते थे, जिससे महाराज युधिष्ठिरका प्रिय और हित हो॥ ६-७॥✎ 1713