श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.75.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 75 · अथ पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः

युयुधानो विकर्णश्‍च हार्दिक्यो विदुरादयः।

बाह्लीकपुत्रा भूर्याद्या ये च सन्तर्दनादयः॥ ६

yuyudhāno vikarṇaśca hārdikyo vidurādayaḥ|

bāhlīkaputrā bhūryādyā ye ca santardanādayaḥ|| 6

अर्थ

परीक्षित्! इसी प्रकार सात्यकि, विकर्ण, हार्दिक्य, विदुर, भूरिश्रवा आदि बाह्लीकके पुत्र और सन्तर्दन आदि राजसूय यज्ञमें विभिन्‍न कर्मोंमें नियुक्त थे। वे सब-के-सब वैसा ही काम करते थे, जिससे महाराज युधिष्ठिरका प्रिय और हित हो॥ ६-७॥✎ 1713

यह अर्थ श्लोक 6–7 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1713 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: उदार-शिरोमणि → उदारशिरोमणि

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