na tatyajū raṇaṃ svaṃ svaṃ lokadvayajigīṣavaḥ|| 25
अर्थ
परीक्षित्! शाल्वके सेनापतियोंने भी यदुवंशियोंपर खूब शस्त्रोंकी वर्षा कर रखी थी, इससे वे अत्यन्त पीड़ित थे; परन्तु उन्होंने अपना-अपना मोर्चा छोड़ा नहीं। वे सोचते थे कि मरेंगे तो परलोक बनेगा और जीतेंगे तो विजयकी प्राप्ति होगी॥ २५॥
शाल्वानीकपशस्त्रौघैर्वृष्णिवीरा भृशार्दिताः।
न तत्यजू रणं स्वं स्वं लोकद्वयजिगीषवः॥ २५
परीक्षित्! शाल्वके सेनापतियोंने भी यदुवंशियोंपर खूब शस्त्रोंकी वर्षा कर रखी थी, इससे वे अत्यन्त पीड़ित थे; परन्तु उन्होंने अपना-अपना मोर्चा छोड़ा नहीं। वे सोचते थे कि मरेंगे तो परलोक बनेगा और जीतेंगे तो विजयकी प्राप्ति होगी॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.76.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 605) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/76/25/