श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.76.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 76 · अथ षट्सप्ततितमोऽध्यायः

न यदूनां कुले जातः श्रूयते रणविच्युतः।

विना मत् क्लीबचित्तेन सूतेन प्राप्तकिल्बिषात्३॥ २९

na yadūnāṃ kule jātaḥ śrūyate raṇavicyutaḥ|

vinā mat klībacittena sūtena prāptakilbiṣāt|| 29

अर्थ

सूत! हमने ऐसा कभी नहीं सुना कि हमारे वंशका कोई भी वीर कभी रणभूमि छोड़कर अलग हट गया हो! यह कलंकका टीका तो केवल मेरे ही सिर लगा। सचमुच सूत! तू कायर है, नपुंसक है॥ २९॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्तकल्मषात्।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 605)

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