श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.76.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 76 · अथ षट्सप्ततितमोऽध्यायः

व्यक्तं मे कथयिष्यन्ति हसन्त्यो भ्रातृजामयः।

क्लैब्यं कथं कथं वीर तवान्यैः कथ्यतां मृधे॥ ३१

vyaktaṃ me kathayiṣyanti hasantyo bhrātṛjāmayaḥ|

klaibyaṃ kathaṃ kathaṃ vīra tavānyaiḥ kathyatāṃ mṛdhe|| 31

अर्थ

मेरी भाभियाँ हँसती हुई मुझसे साफ-साफ पूछेंगी कि ‘कहो, वीर! तुम नपुंसक कैसे हो गये? दूसरोंने युद्धमें तुम्हें नीचा कैसे दिखा दिया?’ ‘सूत! अवश्य ही तुमने मुझे रणभूमिसे भगाकर अक्षम्य अपराध किया है!’॥ ३१॥

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