श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.76.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 76 · अथ षट्सप्ततितमोऽध्यायः

संवत्सरान्ते भगवानाशुतोष उमापतिः।

वरेणच्छन्दयामास शाल्वं शरणमागतम्॥ ५

saṃvatsarānte bhagavānāśutoṣa umāpatiḥ|

vareṇacchandayāmāsa śālvaṃ śaraṇamāgatam|| 5

अर्थ

यों तो पार्वतीपति भगवान् शंकर आशुतोष हैं, औढरदानी हैं, फिर भी वे शाल्वका घोर संकल्प जानकर एक वर्षके बाद प्रसन्‍न हुए। उन्होंने अपने शरणागत शाल्वसे वर माँगनेके लिये कहा॥ ५॥

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