श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.76.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 76 · अथ षट्सप्ततितमोऽध्यायः

देवासुरमनुष्याणां गन्धर्वोरगरक्षसाम्।

अभेद्यं कामगं वव्रे स यानं वृष्णिभीषणम्॥ ६

devāsuramanuṣyāṇāṃ gandharvoragarakṣasām|

abhedyaṃ kāmagaṃ vavre sa yānaṃ vṛṣṇibhīṣaṇam|| 6

अर्थ

उस समय शाल्वने यह वर माँगा कि ‘मुझे आप एक ऐसा विमान दीजिये जो देवता, असुर, मनुष्य, गन्धर्व, नाग और राक्षसोंसे तोड़ा न जा सके; जहाँ इच्छा हो, वहीं चला जाय और यदुवंशियोंके लिये अत्यन्त भयंकर हो’॥ ६॥

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