भगवान् शंकरने कह दिया ‘तथास्तु!’ इसके बाद उनकी आज्ञासे विपक्षियोंके नगर जीतनेवाले मय दानवने लोहेका सौभनामक विमान बनाया और शाल्वको दे दिया॥ ७॥
तथेति गिरिशादिष्टो मयः परपुरंजयः।
पुरं निर्माय शाल्वाय प्रादात्सौभमयस्मयम्॥ ७
भगवान् शंकरने कह दिया ‘तथास्तु!’ इसके बाद उनकी आज्ञासे विपक्षियोंके नगर जीतनेवाले मय दानवने लोहेका सौभनामक विमान बनाया और शाल्वको दे दिया॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.76.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 603) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/76/7/