vṛthā tvaṃ katthase manda na paśyasyantike'ntakam|
pauruṣaṃ darśayanti sma śūrā na bahubhāṣiṇaḥ|| 19
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘रे मन्द! तू वृथा ही बहक रहा है। तुझे पता नहीं कि तेरे सिरपर मौत सवार है। शूरवीर व्यर्थकी बकवाद नहीं करते, वे अपनी वीरता ही दिखलाया करते हैं’॥ १९॥
वृथा त्वं कत्थसे मन्द न पश्यस्यन्तिकेऽन्तकम्।
पौरुषं दर्शयन्ति स्म शूरा न बहुभाषिणः॥ १९
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘रे मन्द! तू वृथा ही बहक रहा है। तुझे पता नहीं कि तेरे सिरपर मौत सवार है। शूरवीर व्यर्थकी बकवाद नहीं करते, वे अपनी वीरता ही दिखलाया करते हैं’॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.77.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 608) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/77/19/