॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.77.4
गदसात्यकिसाम्बाद्या जघ्नुः सौभपतेर्बलम्।
पेतुः समुद्रे सौभेयाः सर्वे संछिन्नकन्धराः॥ ४
gadasātyakisāmbādyā jaghnuḥ saubhapaterbalam|
petuḥ samudre saubheyāḥ sarve saṃchinnakandharāḥ|| 4
अर्थ
इधर गद, सात्यकि, साम्ब आदि यदुवंशी वीर भी शाल्वकी सेनाका संहार करने लगे। सौभ विमानपर चढ़े हुए सैनिकोंकी गरदनें कट जातीं और वे समुद्रमें गिर पड़ते॥ ४॥